गाय को मैंने कभी धर्म से जोड़कर नहीं देखा.. धर्म में भी गाय का महत्त्व है ये मुझे बहुत बाद में पता चला… मुझे नहीं पता था कि अंत समय में बछिया दान करने से वही आपको वैतरणी पार कराएगी…या गाय के शरीर में फलां देवी-देवता का वास है..गाय के शरीर से कुछ विशेष तरंगे निकलती हैं..आदि..
ये सब तो बहुत बाद में पढने में आया…
इनपर फिर भी कभी ध्यान नहीं गया… कभी हमने “गाय के लाभ” पर ध्यान नहीं दिया… गाय से हमेशा आत्मीयता स्वतः ही रही..क्योंकि मैं मनुष्य हूँ, और कोई मनुष्य किसी भी निरीह प्राणी के प्रति हिंसक और निर्दयतापूर्वक व्यवहार नहीं कर सकता, और विशेषकर गाय के प्रति..
..गायों के झुण्ड को कितनी ही देर तक नल चलाकर पानी पिलाने का सुख लिया है…बाल्टियों पानी पी जाती हैं इतनी प्यासी रहती हैं..,पहले कुछ दिन संकोच में पास आकर खड़ी हो जाएँगी पर बाल्टी में मुंह नहीं डालेंगी…कुछ दिन आप पानी पिलायेगे तो फिर साधिकार आपकी बाल्टी में मुंह डालकर पानी पियेंगी…इससे सुन्दर दृश्य क्या होगा..
हल्का सा सहला दो तो गर्दन आपके सामने उठा देंगी, आँख बंद कर आपके आत्मीय स्पर्श का आनंद लेंगी…आप अपनी जगह से थोडा खिसके तो आपके पास आ जाएँगी..
हमने कभी गाय को रोटी उसके सामने फेंककर नहीं दी..हमेशा हाथ से खिलाया है…. गाय तो कुत्तों के पिल्लों को भी दूध पिलाते पायी जाती है, और सूअर के बच्चों को भी…वो आदमी, जानवर कुत्ता सूअर में भेद नहीं करती..
आप उसे काट कैसे सकते हो ?..
क्या आप कुत्ते से भी गए गुजरे हैं ?… आपकी तुलना सूअर से भी नहीं की जाए ?..
आप मनुष्य तो न रहे, पर क्या जानवर से भी नीचे गिर गए ?
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