TMC सांसदों पर हमले का पूरा मामला था क्या आखिर ?
आपको ज्ञात होगा कि TMC सांसद और बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को हाल ही में जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ा। जनता इस हद तक आक्रोशित थी कि उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर अंडे बरसाए और कथित रूप से मारपीट की। इस दौरान उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ Doctors ने अभिषेक बनर्जी के शरीर पर किसी चोट आदि के निशान न पाकर उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया।
TMC का क्या स्टैंड है इस पर ?
हालाँकि, इसे एक बड़ा Political मुद्दा बनाने की तैयारी में TMC दिख रही है और बाकी विपक्षी दलों का भी उसे सहयोग मिल रहा है। राहुल गांधी ने अभिषेक बनर्जी को इलाज के लिए हैदराबाद ले जाने की सहायता उपलब्ध कराने की ममता बनर्जी को पेशकश की है। और अब समाचार आ रहा है कि TMC के एक और सांसद कल्याण बनर्जी पर भी तथाकथित हमला हुआ है। हालाँकि, राजनीतिक हलकों में इसे एक Political Stunt माना जा रहा है और अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद इसका लाभ लेने और लोगों की सहानुभूति पाने की कोशिश अधिक मानी जा रही है।
आखिर क्या राज है इन हमलों के पीछे ?
खैर, ये हमले क्यों हो रहे हैं? आइए जानते हैं।
अब तक, यानी बंगाल विधानसभा चुनावों के पहले तक हमें यह ज्ञात नहीं था कि बंगाल में जनता वास्तव में क्या-क्या झेल रही है। पर जैसे ही सत्ता परिवर्तन हुआ, नागरिकों को भरोसा हुआ और TMC शासन के अत्याचारों का कच्चा चिट्ठा बाहर आने लगा। जनता ने अत्याचारों की ऐसी-ऐसी दास्तानें सुनाईं कि बिहार के जंगलराज, या उससे भी अधिक भयावह तस्वीर सामने आ गई।
पिछले 2 विधानसभा चुनावोंन मे TMC को बहुमत हासिल होते ही BJP समर्थकों के घरों में लूटपाट, कार्यकर्ताओं की हत्याएँ, बलात्कार आदि की Reporting वहाँ की जनता ने ही की है। गाँवों आदि की भीतरी सड़कों पर TMC के लोगों द्वारा Toll barrier बनाकर गरीबों से वसूली करने के कुकर्म को उजागर किया। कहीं भी घर बनवाने से पहले TMC के गुंडों की Permission जरूरी होती थी और उसमें उनका Cut यानी कमीशन बँधा होता था। गृह निर्माण की सामग्री कहाँ से आएगी, यह भी वही तय करते थे।
Bangladeshi घुसपैठियों को खुला समर्थन, Muslim तुष्टिकरण और तमाम ऐसे जनविरोधी कार्य हुए कि जनता एकदम बौखला सी गई। और जैसे ही सत्ता परिवर्तन हुआ, जनता का आक्रोश TMC के अत्याचारी नेताओं पर निकलने लगा है।
हालाँकि राजनीति में हिंसा की कोई जगह नहीं है। हिंसा तुरंत रोकी जानी चाहिए। पर यह जनता ही है और यही विपक्ष है जो बात-बात पर जनता को बाहर निकालकर सड़कों पर लड़ाई करने का आह्वान करता रहा था, और अब जनता उनके विरोध में निकल आई है तो उन्हें अच्छा नहीं लग रहा है।
इसलिए किसी भी राजनीतिक दल को सत्ता मे रहते जनता की भलाई के के कार्य ही करने चाहिए, न की किसी एक विशेष समुदाय का पक्षपात करना चाहिए जिससे बाकी समुदायों, समूहों मे असंतोष फैले । क्योंकि यही राज्य रहेगा, वही सड़कें रहेंगी और वही जनता रहेगी जिनके सामने से आपको गुजरना होगा। और ये राजनेताओं को तय करना है कि जनता उन पर फूल मालाएं बरसाएगी या फिर पत्थर और अंडे।
TMC के नेताओं को जनता के इस आक्रोश से सबक लेना चाहिए और यदि कभी वे फिर से सत्ता मे आए, जिसकी संभावना फिलहाल तो नजर नहीं आती, तो वे संतुलन बनाकर काम करें, या राजनीति करें। अब आगे भविष्य में क्या होगा ये देखने की बात है ।
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