सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर सख़्त टिप्पणी, राज्य सरकारों और डॉग-फीडर्स की जवाबदेही तय
नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में चल रही आवारा कुत्तों से जुड़ी सुनवाई के दौरान आज अदालत ने बेहद कड़ी टिप्पणियां कीं। इस मामले में तीन एनिमल संगठनों ने यह मांग रखी है कि सड़कों से आवारा कुत्तों को न हटाया जाए। इन संगठनों की ओर से भारत के टॉप टेन वकीलों में गिने जाने वाले कपिल सिब्बल, पिंकी आनंद और अरविंद दातार अदालत में पेश हुए और आवारा कुत्तों के पक्ष में मुकदमा लड़ा।
हालांकि, आज सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि आपको सड़कों पर घूम रहे आवारा बच्चे और अनाथ बच्चे नजर नहीं आते, लेकिन आवारा कुत्ते नजर आते हैं। आप इंसानों की सेवा नहीं कर रहे हैं, आप कुत्तों की सेवा कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जो लोग कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उनकी भी जवाबदेही तय होगी। यदि किसी इलाके में कुत्ता किसी व्यक्ति को काटता है, तो उस क्षेत्र में कुत्तों को खाना खिलाने वालों से भी सरकार मुआवजा वसूले। इसके अलावा, अब भारत के हर एक राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी कि अगर किसी को कुत्ता काटता है, तो राज्य सरकार को मुआवजा देना पड़ेगा।
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सुनवाई के दौरान जब अरविंद दातार ने यह सवाल उठाया कि इकोसिस्टम में कुत्तों की भी भूमिका है, तो जज ने उनसे पूछा कि कुत्तों को खाने वाले जानवर कौन हैं और पिछले एक साल में कितने बाघ, शेर और लकड़बग्घों ने कुत्तों का शिकार किया है। इस सवाल के बाद वकील की बोलती बंद हो गई।
इसके बाद जज साहब ने टिप्पणी की कि रणथंभौर के एक बाघ की मौत एक आवारा कुत्ते को खाने से हो गई थी, क्योंकि उस कुत्ते के अंदर ऐसा वायरस था, जिसका कोई इलाज नहीं है। यानी अगर कुत्तों को बाघ खाए, तो उस बाघ की भी मौत हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि हम लोगों को बच्चों और महिलाओं को हर रोज कुत्तों के काटने से मरते और तड़पते नहीं देख सकते। आवारा कुत्तों की समस्या विकराल बन चुकी है और इसमें सभी राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं, जिन्होंने अब तक कोई ठोस काम नहीं किया।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठाया गया कि कपिल सिब्बल, पिंकी आनंद और अरविंद दातार को इतनी मोटी फीस ये पेटा और दूसरे संगठन क्यों दे रहे हैं। आरोप यह है कि इन संगठनों को दुनिया की तमाम रेबीज वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से भारी फंडिंग मिलती है।
पूरी दुनिया में भारत ऐसा देश है, जहां रेबीज वैक्सीन की सबसे ज्यादा मांग है, क्योंकि दुनिया में सबसे ज्यादा कुत्ते काटने की घटनाएं भारत में होती हैं। अमेरिका, जर्मनी, चीन और भारत—ये सिर्फ चार देश हैं जो रेबीज की वैक्सीन बनाते हैं। भारत में जितनी वैक्सीन बनती है, वह जरूरत से बहुत कम है, इसलिए भारत को वैक्सीन इंपोर्ट करनी पड़ती है।
जिन देशों में वैक्सीन बनती है, वहां खुद सड़कों पर आवारा कुत्तों पर प्रतिबंध है। अमेरिका और यूरोप में आवारा कुत्तों को या तो गोली मार दी जाती है या उन्हें शेल्टर में बंद कर दिया जाता है। लेकिन इन देशों की वैक्सीन कंपनियां चाहती हैं कि भारत में आवारा कुत्ते सड़कों पर घूमते रहें, ताकि उनका वैक्सीन का धंधा चलता रहे।
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लेखक परिचय:
जितेंद्र सिंह सोशल मीडिया पर अत्यंत सक्रिय और चर्चित राइट विंग लेखक माने जाते हैं। उनकी लेखनी तथ्य, ठोस जानकारी और तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित होती है, जिसमें ऐतिहासिक, राजनीतिक और सामाजिक विषयों का गहन विश्लेषण देखने को मिलता है। वे जटिल मुद्दों को तार्किक और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।











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