भूमिका
जब भी मुस्लिम देशों की बात की जाती है सबकुछ आकर सऊदी अरब और ईरान, ईराक, कतर पर आकर समाप्त हो जाता है. लेकिन यह भी एक स्थिति है कि इस धरती पर Islam के एक और रूप मौजूद है.
यहाँ Islam की अच्छाई नहीं बता रहा हूँ क्योंकि Islam तो अच्छा हो ही नहीं सकता है.
अरब से अलग सांस्कृतिक पहचान
यहाँ जिन लोगों ने अपनी Culture और और क्षेत्रीय पहचान को Arab से अलग रखा है. उन लोगों ने Islam के बाद भी अपने को बचाए रखा.
जैसे उत्तरी अफ्रीका का एक देश है मोरक्को.
मोरक्को और यहूदियों का प्रश्न
जब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहाँ के यहूदियों को पोलैंड भेजने को कहा तो सुल्तान महमूद पंचम ने इसे सीधे तौर पर मना कर दिया.
जबकि 1912 के मोरक्को और फ्रांस के बीच हुए प्रोटेक्टेरेट समझौते के अंतर्गत फ्रांस के पास मोरक्को के निर्णय का अधिकार था.
और फ्रांस को जीतने के साथ जर्मनी और हिटलर के पास मोरक्को पर अधिक दबाव था और एक तरह से मोरक्को जर्मनी के अधीन था.
सुल्तान ने साफ मना कर दिया था.
फिलीस्तीन बनाम मोरक्को
जबकि वहीं फिलीस्तीन की ग्रैंड मस्जिद यानी शाही मस्जिद के इमाम स्वयं हिटलर से मिलने गए कि इजरायल के यहूदियों को मार डालो.
और इसी के लिए आज भी आपको भारत और पाकिस्तान के मुसलमान हिटलर की कभी ना कभी प्रशंसा करते मिल जाएँगे.
सुन्नी होते हुए भी अलग रास्ता
जबकि मोरक्को भी सुन्नी बाहुल्य ही देश था और है.
और मोरक्को में भी आज तक राजशाही ही चल रही है.
और मोरक्को कभी Arab का हिस्सा हुआ करता था.
क्योंकि अरबों ने यहीँ से अंदलुसिया यानी आईबेरियन पेलेनस्युला यानी आज के स्पेन और पुर्तगाल को जीता था.
और स्पेन और पुर्तगाल से भगाए जाने के बाद अधिकांश मुसलमान यहीं आएँ.
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ट्यूनीशिया: एक अपवाद
इसी के साथ ही यहीं इसके पास अल्जीरिया के दूसरी ओर ट्यूनीशिया है.
जो एकमात्र ऐसा मुस्लिम देश है जहाँ पूर्ण Democracy है.
और जहाँ सेना नहीं हावी हुई.
और इंटरनेट की प्रसिद्ध अरब स्प्रिंग या जैस्मीन स्प्रिंग यहीं से आरंभ हुई थी.
जहाँ सत्ता बदली गई फिर भी इस्लामिक सत्ता नहीं आई.
उस्मानिया से दूरी
मोरक्को कभी भी उस्मानिया के नियंत्रण में नहीं आया.
और यह एकमात्र ऐसा देश रहा जहाँ का Islam सदा से प्रचलित Islam से अलग रहा.
और वहीं ट्यूनीशिया ऐसा देश रहा जो Democracy में विश्वास करता आया.
नस्ल, अरब पहचान और वास्तविकता
और दोनों ही Arab माने जाते हैं.
वैसे नस्लीय रूप से अमजैग या बर्बर हैं.
लेकिन हैं Arab.
निष्कर्ष
तो यदि आप अपनी सांस्कृतिक विरासत और Nationalism को बचाए रखें तो आप Islam जैसे खतरनाक वायरस के बाद भी बीमार नहीं होंगे.
अब यहाँ देखा जाए तो मोरक्को और ट्यूनीशिया जैसे देश अपने Present से अधिक प्रेम करते हैं बजाए किसी History और कहानियों के.
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This article is written by Harishankar Shahi, a journalist with in-depth knowledge of finance, politics, and science. He is known for presenting complex topics in a clear, factual, and reader-friendly manner. His writing focuses on analysis, context, and real-world impact, helping readers better understand issues that shape the economy, governance, and society. His Facebook profile link:
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