विपक्ष क्यों खुद मोदी को मजबूत कर रहा है?

Narendra Modi absorbing power from opposition leaders

राजनीति, सिंपैथी और विपक्ष की भूलें

यह कहना तो विशुद्ध राजनीति है कि सदन में प्रधानमंत्री को खतरा था इसीलिए आने की अनुमति नहीं दी। लेकिन राजनीति करने ही तो राजनीति में आए हैं? तो बीजेपी यह सिंपैथी वाली राजनीति करेगी ही। और जब मौका ही राहुल गाँंधी और विपक्ष का घमंड देता है। तो उनकी क्या गलती।

अमेरिका की तर्ज पर कॉन्फीडेंट दिखाने के चक्कर में राहुल गाँधी के एनजीओ सलाहकारों और जामिया, जेएनयू ने इनको घमंडी की छवि बना दी है। जबकि भारत में नेता माने विनम्रता की मूर्ति होना चाहिए। जहाँ मोदी बेचारे बन जाते हैं। और आम आदमी से कनेक्ट कर जाते हैं। वहीं राहुल और अखिलेश जैसे विलेन।

असली मुद्दों से बचता विपक्ष

और घेरने वाली चीज पर बात नहीं होती है। जैसे प्रधानमंंत्री मुद्रा योजना जैसी कई बैंकिंग योजनाओं और सेल्फ हेल्प ग्रुप की बात करते हैं। जबकि हम सबको पता है कि यह योजनाएँ बैंक मैनेजरों की घूसखोरी का अड्डा बन चुकी हैं। कई कौशल विकास योजनाएँ और सेल्फ हेल्प ग्रुप केवल नाम के हैं।

यहाँ से पैसों की बंदर-बांट हो रही है। क्योंकि यहाँ से कम ब्याज पर पैसा मिल जाता है। तो यही पैसा लाभ लेकर ब्याज पर चलाया जा रहा है। गाँव-गाँव इसके दलाल धड़ल्ले से तैयार हो गए हैं। और योजना आते ही गरीब और दलाल मिलकर लूटने का काम आरंभ कर देते हैं।

तो इन सब जमीनों बातों पर विपक्ष को घेरना चाहिए। लेकिन विपक्ष को लगता है कि बस हम बता दें कि हमारे दादा ने भारत पर कितना अहसान किया है और जनता हमको चुन लेगी।

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अनावश्यक बयान और रणनीतिक चूक

बताइए राहुल गाँधी को बिट्टू को ट्रेटर यानी गद्दार कहने की क्या जरूरत थी? और यदि कह भी दिया तो उसे हंसी-मजाक में टाल देते।

लेकिन नहीं, श्रीवत्स जैसे सलाहकार और सुप्रिया श्रीनेत जैसी घमंडी प्रवक्ता के जरिए इसे लीप रहे हैं। कह देते कि दोस्ती में कहा था जैसे किसी पुराने परिचित को हम लोग हल्के-फुल्के मजाक में कहते हैं। अब अगर इस पर बीजेपी राजनीति करेगी तो कहेंगे राजनीति कर रहे हैं। सोचो तो क्या कर रहे हो।

किताब, प्रचार और अतिशयोक्ति

अब नरवाने की किताब पर ऐसा छाती पीटना हो रहा है कि किसी अंधे को भी दिख जाए कि केवल किताब का प्रचार भर है। बाकी नरवाने स्वयं जीवित हैं। और किताब में वह बात किस संदर्भ में लिखी है। और “जो समझ आए वह करिए” कहने का एक ही अर्थ कैसे है?

विपक्ष की मौजूदा स्थिति

सही कहा जाए तो भारत का विपक्ष एकदम उस स्थिति में है कि आम जनता सोचती है कि यह विपक्षी ना चुनाव जीतें इसीलिए मोदी जी ही ठीक हैं। और यह हालत भारत देश की तीन दिशाओं में है ही। और चौथी में तो कांग्रेस है ही नहीं। वहाँ भाषा की बाधा है नहीं तो अब तक मोदी जी दक्षिण विजय कर चुके होते।

विपक्ष को बचपना बंद करना होगा। इतने दिन बीत गए किसी ने भी समता संवर्धन पर बीजेपी को नहीं घेरा। उल्टे बीजेपी इस समय दलित पिछड़ा की आवाज बनी है और पूरा विपक्ष ब्राह्मण (सवर्ण) और मुसलमान की।

अब यह क्या है? बीजेपी का ईवीएम हैक ही है ना? किसान के नाम पर जाट दिखेंगे। तो बाकी किसान क्यों ना मोदी को वोट दें?


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