छतरी बुद्धिजीविता, जातीय राजनीति और विधायक बनने की लालसा का सच

खुली हिंदी पुस्तक जिसमें छतरी बुद्धिजीविता, जातीय राजनीति और प्रमुख नेताओं जैसे वीपी सिंह और दिग्विजय सिंह पर चर्चा, साथ में बोल्ड हिंदी टेक्स्ट “छतरी बुद्धिजीविता, जातीय राजनीति और विधायक बनने की लालसा का सच”

कहते हैं बावलों की पूँछ ही नहीं होती है। जाति के वीरों की यही कहानी होती है और उनको यदि बुद्धिजीवी होने का कीड़ा काट जाए तो वह कुछ ऐसा होता है कि कोढ़ी को खाज यानी खुजली हो जाए। उदाहरण के लिए छतरी जाति के लोगों में लफंदरी की बुद्धिजीविता कुलांचे मार रही है।

एक छतरी बुद्धुजीवी की पोस्ट फीड में आ रही है जिसे कई छतरी शेयर कर रहे हैं। और शेयर करने वाले को अनफ्रेंड या ब्लॉक करता जा रहा हूँ (कुछ एक को छोड़कर)। वैसे अच्छा ही है इसी बहाने छतरियों की संख्या फ्रेंड लिस्ट से कम होगी। क्योंकि यह कभी भी विषय पर बात नहीं करते हैं।

पहली बात तो यही थी वह कितने बुद्धुजीवी लेखक थे कि वह राजपूत आइडेंटिटी से छतरी को संबोधित करते हुए आरएसएस का विरोध कर रहे थे। मने यह स्वयं मान रहे हैं कि यह छतरी नहीं राजपूत हैं। ठीक है फिर काहें को आरएसएस और आर्य समाज को समस्या है।

उसके बाद यह बता हैं कि “राजपूत युवा” राजा-महाराजा की फैंटेसी में जीता है। जबकि उसी पोस्ट में “राजा“ मांडा वीपी सिंह और दिग्गी “राजा” की महानता की अफीम खिलाई जा रही है। छतरियों में गहरवारी लफंदरी का रोग इतना भयानक लगा है कि कोरोना क्या ही था।

मतलब इनको वीपी सिंह को हीरो बनाना है। क्यों? इसलिए नहीं की वीपी सिंह कोई बौद्धिक आइकन हैं। या कोई राजनैतिक आइकन हैं। यह होते तो ध्यानचंद, हरि सिंह गौर, या राजनीति में त्रिभुवन नारायण सिंह को याद करते। लेकिन इनको वीपी सिंह और चंद्रशेखर या दिगविजय सिंह चाहिए।

क्यों? क्योंकि यह कैसे भी समीकरण बनाकर विधायक बनना चाहते हैं। कैसे भी पिछड़ा के साथ समीकरण बन जाए और यह चुनाव जीतकर दबदबा वाले विधायक बन जाएँ। इनको लोकतंत्र में राजा बनना है। खैर ठीक है इनकी इच्छा। लेकिन छतरी इन बातों को समझने में कितना समझदार है।

मतलब जो राहुल गाँधी गैंग इनको सहारनपुर से लेकर हर मामले में गाली देती है। उस राहुल गाँधी के गुरु के साथ यह सेट होंगे? मतलब जो आरजेडी कविता पढ़वाती है वहाँ यह विधायकी का टिकट लेंगे। यह जबरिया वीपी को हीरो बनाएँगे। काहें को कोई हीरो माने जी?

अहीर जाति के नेता मुलायम जब सत्ता पाए तो अहीर जाति के जाने-माने डकैत छबिराम के लड़के को पुलिस में भर्ती कराया। जबकि खानदान में किसी पर केस हो जाए तो जल्दी सरकारी नौकरी के लिए कैरेक्टर सर्टिफिकेट नहीं मिलता है। तो हीरो मुलायम होगा या वीपी?

वैसे ज्यादा लिखना नहीं चाहता हूँ। लेकिन बस फीड में लगातार दिख रही पोस्ट की खीझ में लिख दिया है। पवन सिंह के गाने पर मस्त वालों को शंकर राम सिंह रघुवंशी या नितिन रैकवार का पता भी नहीं होगा। इन्हें उतनी ही किराँति या छतरियापा आता है जितना गुरुजी नैरेटिव में खिलाते हैं।

बृजभूषण सिंह इस समय एंटी योगी ब्रिगेड की दुकान खोले हैं। जहाँ योगी मोदी शाह एक साइड और बिरजू दबदबा वाले आरएसएस के साथ एक साइड। सबकी अपनी सेटिंग है।

इसीलिए पहले पैर पर खड़ा होना सीखना चाहिए। लेकिन अब राजा नहीं विधायक बनना है। चाहें राजा मांडा की कसम या दिग्गी राजा की।


पढ़ें अन्य स्थानीय लेख : https://inkindianews.com/local-news/

बाहरी कड़ियाँ : https://dspmuranchi.ac.in/pdf/Blog/caste%20in%20india.pdf

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © 2025 | inkindianews.com. All Rights Reserved

About Us Privacy Policy Terms & Conditions Sitemap Contact Us