प्रवास करना मनुष्य का स्वभाव है। Homo sapiens की कहानी Migration के बिना संभव नहीं। शब्दशः मनुष्य के DNA में प्रवास की छाप है, और उसी आधार पर हम तय करते हैं कि कौन कहाँ से आए। तमाम आस्थाओं और संस्कृतियों में, देशों के इतिहास में, युद्ध और शांति में, भाषाओं में, व्यापार में, दुनिया के हर पन्ने में Migration शामिल है। क्या यह कहा जा सकता है कि प्रवास ‘जरूरी’ है? प्रवास न होता तो वह दुनिया ही न होती, जिसमें हम रह रहे हैं?
Amman Journey और History की Layers
जिस वक्त मैं यह पंक्तियाँ लिख रहा हूँ, मैं Amman (Jordan) की यात्रा पर हूँ। यहाँ एक ऊँचा टीला है, जिससे पूरा नगर दिखता है। उस टीले पर महज आधे किलोमीटर में यहाँ के Stone Age के कुछ अवशेष हैं, उसके ठीक पड़ोस में एक Roman bath के अवशेष और Hercules का मंदिर, उन अवशेषों से ही Byzantine church के अवशेष भिड़े पड़े हैं, और उनके खंभों और पत्थरों से बनी Umayyad mosque भी वहीं मौजूद है। यह भेद करना कठिन है कि किसकी सीमा कहाँ खत्म होती है, कौन यहाँ कब कैसे आकर बसते गए। ऐसे टीलों से दुनिया भरी पड़ी है, और मिट्टी की ये परतें Migration की अनंत layers हैं।
Migration की पीड़ा और Emotional Side
लेकिन, Migration की एक और छवि है। उस छवि में Migration की पीड़ा है। Pankaj Udhas के गाये गीत ‘चिट्ठी आयी है’ पर भावुक होते migrants हैं। Manna Dey के गीत ‘ऐ मेरे प्यारे वतन’ पर अपने homeland को याद करते। किसी सुदूर देश में अपने देश का एक Bonsai tree रोपते, ‘Mini-India’ बसाते, छुट्टियों में लौट कर आँसू बहाते फिर से वापस जाते। Bhisham Sahni की कथा ‘ओ हरामजादे’ के वह ग्लानि से भरे Sikh, जिन्हें उनके पिंड के लोगों के अपशब्द याद आते हैं। Chhath में trains में खड़े होकर लंबी यात्रा करते लोग, जिनकी हर साल यह इकलौती यात्रा होती है। जब एक migrant दूसरे migrant के साथ बैठ कर कहता है— ‘हमने Migration किया ही क्यों? चलो! अब लौट चलें!’
क्या इसका अर्थ है कि Migration unnecessary है? Migration मजबूरी है? समर्थ को Migration करना ही नहीं चाहिए?
Migration, Migration, Displacement — फर्क समझिए
पहली चीज कि Migration, पलायन और Displacement एक ही शब्द नहीं हैं। Migration के लिए दो मुख्य कारण मिलते हैं— Push किया जाना, या Pull कर लिया जाना। जैसे जब माँ-बाप कहते हैं— ‘यहाँ कुछ नहीं रखा, Delhi जाकर कमाओ’। उन्हें मालूम होता है कि जिस दिन वह बस पर चढ़ाने जा रहे होते हैं, उसके बाद वह शायद कभी न लौटे। फिर भी वे ऐसा करते हैं। इस Push के अनेक local कारण हो सकते हैं— मूल स्थान पर opportunities का अभाव, कोई खतरा, future insecurity आदि।
दूसरा उदाहरण यह हो सकता है कि Punjab के गाँव में किसी दोस्त का phone आए— ‘Canada आ जाओ, यहाँ opportunity ही opportunity है’। Punjab, Gujarat या Kerala अपेक्षाकृत prosperous states हैं, फिर भी इन राज्यों से भारी मात्रा में Migration होता है। इसका कारण Push नहीं, बल्कि Pull होता है— better opportunity की तलाश।
दोनों ही स्थितियों में Migration का उद्देश्य positive ही होता है— individual growth। Migration की पीड़ा या guilt उसके बाद पनप सकती है, लेकिन वह मूल उद्देश्य नहीं था।
Entanglement: जब Migration मजबूरी बन जाता है
Migration का तीसरा कारण है— Entanglement। जैसे किसी व्यक्ति की job ही ऐसी हो, जिसमें anywhere transfer संभव हो। वह व्यक्ति चाह कर भी अपने native place पर नहीं रह सकता। Country के अंदर भी Migration हो सकता है, और country के बाहर भी। धीरे-धीरे family वहीं settle हो जाती है, और उसके बाद return कठिन होता जाता है। Migrants का बड़ा समूह ऐसे लोगों से बना है, जो न Push किए गए, न Pull किए गए— बल्कि livelihood में फँस गए।
बिना Migration की दुनिया
मान लें कि यह तीनों कारण न हुए होते। दुनिया में ऐसे कई लोग हैं, जो अपने native place से कभी Migration नहीं हुए। मैंने Norway के जिस town में निवास किया, वहाँ ऐसे सैकड़ों लोग हैं जिनके grandparents भी वहीं रहते थे, और वे भी वहीं रहते हैं। उनकी world उसी boundary में सीमित है। बाहर की दुनिया की खबर उन्हें सिर्फ news से मिलती है। Easter पर किसी ने Japan travel की photos लगाईं, तो उन्होंने पूछा— क्या वहाँ भी Easter मनाया जाता है? वे educated हैं, फिर भी Migration के अभाव ने उन्हें well-educated होकर भी frog-in-the-well बना दिया।
Cultural Exchange और Migration
Migration एक two-way process है। एक culture जब दूसरे स्थान पर पहुँचती है, तो दोनों cultures exchange करते हैं। जब यह process extreme पर जाती है, तब cultural clash भी होता है और shared culture का creation भी। India में historical रूप से कई cultures का Migration हुआ, और India से भी बाहर Migration हुआ। शायद इसी कारण भारतीयों की cultural understanding comparatively बेहतर रही है।
America तो migrants का ही country है। वहाँ हर व्यक्ति किसी न किसी level पर migrant है। सबसे पुराने Americans के ancestors भी centuries पहले के migrants थे। America की cultural capital इसी diversity से बनी। अगर Migration curse होता, तो America न बनता, न superpower बनता। विडंबना यह है कि migrants से बना America अब migrants पर ही restriction लगाने लगता है।
Migration: जरूरी या संतुलन?
क्या हर व्यक्ति को Migration करना चाहिए? क्या Migration ही human development का मार्ग है? आज यह असंभव सोच है कि हर इंसान हमेशा Migration करता रहे। Migration individual level पर जरूरी न हो, लेकिन society level पर आवश्यक हो सकता है।
अगर कोई society पूरी तरह Migration कर जाए, तो culture समाप्त हो जाएगा। African slaves का example इसका प्रमाण है। America ने Liberia बनाकर African-Americans को वापस बसाने की कोशिश की, लेकिन experiment असफल रहा। Roots टूट चुकी थीं।
इसलिए Migration की जरूरी शर्त है— Roots intact रहें। Native society alive रहे।
Migration के लाभ
1. Remittance (Foreign Money): 2025 के आँकड़ों के अनुसार migrants द्वारा भेजा गया सबसे अधिक धन India को मिला— लगभग 135 billion dollars।
2. Cultural Expansion: Food, music, language, festivals— Indian culture global हुआ। Ravi Shankar का America Migration इसका उदाहरण है।
3. Global Influence: Soft power का विस्तार— Sundar Pichai, Satya Nadella, Nikesh Arora जैसे नाम India की पहचान बनाते हैं।
4. Trade & Investment: Silk Route से लेकर IT industry तक, Migration ने trade routes बनाए।
Great Indian Diaspora
Great Indian Diaspora आज दुनिया का सबसे बड़ा migrant community बन चुका है— engineers, doctors, workers, students। अधिकांश ने personal growth के लिए Migration किया, लेकिन indirect benefit India को मिला। जरूरी है कि Migration balanced रहे— न source empty हो, न destination conflict में जाए।
[Praveen Kumar Jha का यह लेख ‘Aha Zindagi’ पत्रिका में पूर्व प्रकाशित]
पढिए फीचर लेख: https://inkindianews.com/featured-articles/
https://worldmigrationreport.iom.int/msite/wmr-2024-interactive

प्रवीण कुमार झा कथेतर रुचि के लेखक हैं। गिरमिटिया इतिहास पर उनकी शोधपरक पुस्तक ‘कुली लाइंस’ चर्चित रही। संगीत इतिहास पर आधारित पुस्तक ‘वाह उस्ताद’ को कलिंग लिट्रेचर फ़ेस्टिवल 2021 ने ‘बुक ऑफ द यर’ से सम्मानित किया। उन्होंने इतिहास पुस्तकों के अतिरिक्त लघु यात्रा-संस्मरण भी लिखे हैं और उनके स्तंभ प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। प्रवीण का जन्म बिहार में हुआ और वह भारत के भिन्न-भिन्न स्थानों से गुजरते हुए अमेरिका और यूरोप में रहे। वह सम्प्रति नॉर्वे में विशेषज्ञ चिकित्सक हैं।
Praveen Kumar Jha is a writer of non-fiction. His research-based book on Girmitiya history, Kuli Lines, has received wide recognition. His book on music history, Wah Ustad, was honored as Book of the Year at the Kalinga Literature Festival 2021.
In addition to history books, he has also written short travel memoirs, and his columns have been published in leading magazines. Praveen was born in Bihar and has lived in various parts of India before spending time in the United States and Europe. He is currently working as a specialist physician in Norway.











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