अमेरिका की एक सच्चाई है दुनिया के लगभग सभी बड़े देश वहाँ lobbying पर भारी पैसा खर्च करते हैं। ये lobbyist ज़्यादातर पूर्व सीनेटर, रिटायर्ड नेता या सत्ता के गलियारों में गहरी पकड़ रखने वाले लोग होते हैं। उनका काम सीधे सत्ता के केंद्रों और उनके staff को प्रभावित करना होता है। यह पूरा तंत्र पारदर्शी है। विदेशी सरकारों के लिए काम करने वाले हर lobbyist को अमेरिकी न्याय विभाग में रिपोर्ट देनी होती है, जो सार्वजनिक होती है। यानी यह कोई गुप्त साज़िश नहीं, बल्कि खुला शक्ति-तंत्र है।
भारत ने लंबे समय तक इस व्यवस्था को या तो नज़रअंदाज़ किया या नैतिकता के भ्रम में इससे दूरी बनाए रखी। पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया। उसने लगातार और रणनीतिक तरीके से पैसा लगाया। इस साल पहली बार भारत ने भी गंभीर राशि खर्च की – लगभग पाकिस्तान के बराबर। पाकिस्तान ने भी अपना खर्च बढ़ाया। लेकिन परिणाम सामने हैं। इस साल पाकिस्तान ने अमेरिकी सत्ता-वृत्तों में अपनी पकड़ मज़बूत की, रिश्तों में बढ़त बनाई, जबकि भारत न सिर्फ अपना लाभ खो बैठा बल्कि tariff भी झेलना पड़ा। सवाल स्वाभाविक है – हमारे lobbyist कर क्या रहे थे?
अब ज़रा फर्क समझिए। पाकिस्तान के प्रमुख lobbyist में Trump का पूर्व बॉडीगार्ड तक शामिल था – यानी सीधी पहुँच, सीधा असर। भारत की ओर से मुख्य lobbyist वॉशिंगटन का एक अनुभवी चुनाव और छवि प्रबंधन विशेषज्ञ था – ज़्यादा कॉर्पोरेट और औपचारिक सोच वाला। पाकिस्तान ने एक नहीं, कई lobbyist रखे। हर मुद्दे के लिए अलग — कश्मीर, शुल्क, मानवाधिकार, अर्थव्यवस्था। भारत ने ज़्यादातर एक ही व्यक्ति पर भरोसा किया।
सबसे बड़ा अंतर काम करने के तरीके में था। भारत के lobbyist का अधिकांश समय भारतीय बाबुओं और नेताओं की बैठकें तय कराने में चला गया। जबकि बैठक तय करना तो बाबुओं का काम होता है। Lobbyist का असली काम होता है सत्ता के भीतर जाकर माहौल बनाना। कोई भी अमेरिकी मंत्री भारतीय बाबू की दी हुई हज़ार पन्नों की फाइल नहीं पढ़ता। वह दो मिनट में अपने staff से सार सुनता है – और वही नीति बन जाती है। पाकिस्तान के सलाहकार यही कर रहे थे। भारत फाइलें भेजता रहा।
रणनीति में भी फर्क था। पाकिस्तान ने खुद को कमज़ोर, दबा हुआ, पीड़ित देश के रूप में प्रस्तुत किया – “हम गरीब हैं, हमारी बात सुनी जाए।” भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था, बाज़ार के आकार और अपनी वैश्विक ताक़त की बातें कीं। मानवीय स्वभाव है underdog को ज्यादा वरीयता मिलती है | भारत के lobbyist इसमें ऊर्जा लगा रहे थे की whitehouse में ग्रैंड दीवाली सेलिब्रेशन हो भारत की वैश्विक छवि के अनुरूप तो पाकिस्तान के lobbyist समझा रहे थे की हमारे पास पैसे ही नहीं हैं इस सब दिखावे के आप हमारा टैरिफ काम कर दो |
Pakistan’s consultants tried to change what people talk about.
India’s consultants tried to look respectable while people talked.
यही अंतर है – यही लेसन है ।
और यहीं से future सुधार की शुरुआत होगी।
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बाहरी कड़ियाँ : https://www.ndtv.com/world-news/inside-pakistans-lobbying-blitz-in-us-to-halt-indias-operation-sindoor-10386687

Nitin Tripathi is an entrepreneur, software engineer, educator, and writer with a modern yet rooted perspective on life and technology. A graduate of Kamla Nehru Institute of Technology, he is the founder of Om Solutions, where innovation meets practical problem-solving.
A passionate runner and a devoted family person, Nitin believes in balance—between work and wellness, tradition and progress.











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