समय के खोए हुए पन्ने: ब्रह्मांड, ज्ञान और नियति की अनकही कहानी

lost knowledge and cosmic mysteries

14 अप्रैल, 1229: लगभग 800 साल पहले एक भिक्षुक ने कुछ पुराने चर्मपत्रों को साफ करके, उन पर लिखी लिपि को मिटाकर, एक नयी प्रार्थना पुस्तक लिखी थी। उस समय पुस्तकों का ऐसा पुनर्प्रयोग एक आम बात थी। 800 साल के बाद यह पुस्तक वर्तमान के तुर्की में एक डेनिश वैज्ञानिक “योहान लुडविग” को मिली। पुस्तक के सूक्ष्म निरीक्षण से उन्हें आश्चर्य हुआ क्योंकि अक्षरों के नीचे मिटाए गए कुछ ऐसे धुंधले इम्प्रेशन्स थे, जो यह इशारा कर रहे थे कि पुस्तक का संबंध प्राचीन ग्रीस से है।

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मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग और एक्स-रे तकनीक की सहायता से यह पता चला कि यह पुस्तक वास्तव में कैल्कुलस की मूल अवधारणाओं पर लिखी गयी किताब थी, जिसे 2000 साल पहले महान ग्रीक वैज्ञानिक आर्किमिडीज ने लिखा था।

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अगर उस भिक्षुक ने इस पुस्तक को नष्ट नहीं किया होता तो क्या कैल्कुलस न्यूटन से कई शताब्दी पहले ही खोज लिया जाता? क्या हम ज्ञान-विज्ञान के स्तर पर समय से आगे होते? यकीन के साथ तो नहीं कहा जा सकता पर यह तय है कि कुछ दुर्योग अपरिहार्य हैं, इतिहास के कुछ पन्ने खो जाना ही शायद नियति का अंग है।

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आज समूचे ब्रह्मांड का आकार निरंतर बढ़ रहा है। प्रति दस लाख प्रकाशवर्ष के क्षेत्र में हर क्षण लगभग 22 किमी का नया “स्पेस” ब्रह्मांड के आकार में जुड़ जाता है। वर्तमान में हम किसी भी दिशा में ब्रह्मांड के 47 अरब प्रकाशवर्ष लंबे हिस्से को टेलिस्कोप की मदद से देख सकते हैं। इस सीमा का दायरा भविष्य में अधिकतम 62 अरब प्रकाशवर्ष होगा। अर्थात, 62 अरब प्रकाशवर्ष के परे का ब्रह्मांड हमारे लिए सदैव एक रहस्य ही रहेगा। कारण – 62 अरब प्रकाशवर्ष के बिंदु से परे का ब्रह्मांड प्रकाश गति से भी तेज हमसे दूर भाग रहा है।

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हमनें ब्रह्मांड के बारे में आज तक जो जान पाया, उसका एकमात्र स्त्रोत आसमान में आकाशगंगाओं के रूप में अपनी आभा बिखेरती ये अनंत रोशनियां ही हैं। पर एक समय ऐसा आएगा, जब देखने के लिए क्षितिज पर कुछ होगा ही नहीं। आज से कुछ अरब साल बाद हमारे लोकल ग्रुप की 50 आकाशगंगाएँ मिलकर एक महाविशालकाय संयुक्त गैलेक्सी को जन्म देंगी, पर ब्रह्मांड की अन्य समस्त आकाशगंगाएं क्षितिज से ओझल हो चुकी होंगी।

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अगर उस समय कोई सभ्यता जन्मती है, तो वह अपनी आकाशगंगा को ही समस्त ब्रह्मांड समझ कर जीने के लिए अभिशप्त होगी। आसमान की रिक्तता उन्हें विस्मित करेगी। ब्रह्मांड की पृष्ठभूमि में मौजूद कॉस्मिक बैकग्राउंड रेडिएशन उन्हें विस्मित तो करेगा, पर उसका अबूझ स्त्रोत उन्हें अचरज में डाल देगा। ब्रह्मांड कैसे आरंभ हुआ, ये पहेली वे कभी न बूझ पाएंगे। उन अभागों को पता ही नहीं होगा कि कालचक्र ने उनके इतिहास का एक जरूरी पन्ना हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया है।

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ब्रह्मांड की एक ऐसी पहेली है, जो आज तक कोई बूझ न पाया। बात दरअसल कुछ यूं है कि आज हम किसी भी दिशा में देखते हैं तो हर जगह कॉस्मिक बैकड्रॉप रेडिएशन यानी CMB का ऊर्जा स्तर हर जगह समान पाते हैं – 2.7 केल्विन।

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ब्रह्मांड निर्माण के लेफ्ट-ओवर रेडिएशन का समान तापमान तभी संभव है, जब पूर्वकाल में सभी प्रकाश-कण एक-दूसरे के डायरेक्ट कांटेक्ट में रहे हों और ऊर्जा का आदान-प्रदान किया हो। आखिरी बार, जब ब्रह्मांड के सभी कण एक-दूसरे के सीधे संपर्क में थे, वह समय बिगबैंग के लगभग 380000 वर्ष बाद का है। इसे “रिकॉम्बिनेशन युग” भी कहते हैं।

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गणित हमें बताता है कि रिकॉम्बिनेशन युग के दौरान भी सिर्फ 9 करोड़ प्रकाशवर्ष के दायरे में मौजूद कण एक-दूसरे के सीधे संपर्क में हो सकते थे। पर तत्कालीन ब्रह्मांड का आकार इससे लगभग तीन गुना – यानी 27 करोड़ प्रकाशवर्ष था। आप कालचक्र को उल्टा घुमा कर ब्रह्मांड के जन्म तक चले जाएं, पर कोई ऐसा समय न पावेगा, जहां समस्त कणों के एक-दूसरे के करीब होने का गणित सही बैठ जावे।

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पर ये समस्या हल हो सकती है, अगर आप “इन्फ्लेशन सिद्धांत” के तहत यह मान लें कि ब्रह्मांड निर्माण के बाद, बेहद अल्प समय के लिए, ब्रह्मांड का प्रसार बेहद द्रुत वेग, यानी 10^26 के फैक्टर से हुआ था। यानी बिना कोई समय बीते ब्रह्मांड का गर्भ-बिंदु एक “तीन फीट के बच्चे” के आकार का हो गया, तो ये समस्या हल हो जाती है। और यह भी स्थापित होता है कि जितना हमें ब्रह्मांड दिख रहा है, वास्तव में वृहद ब्रह्मांड न्यूनतम रूप से 10 अरब-खरब गुना बड़ा है, अधिकतम की सीमा तो अनंत है।

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अब अगर इन्फ्लेशन हुआ, तो क्यों हुआ? अगर ब्रह्मांड वास्तव में एक बिंदु में समाया था, तो वह बिंदु कहाँ अवस्थित था? आखिर किस कारण वह बिंदु दीर्घतम रूप धारण कर तमाम आकाशगंगाओं, सूर्यों, ग्रहों और हमें जन्म देने के लिए उद्यत हुआ? शायद इसका उत्तर हम कभी नहीं जान पाएंगे। यह इतिहास का वो पन्ना है, जिसे हम हमेशा के लिए खो चुके हैं।

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समय का चक्र अटल है।

संयोग और दुर्योग घटित होते हैं।

और समय के कुछ पन्ने हमेशा के लिए खो जाना ही नियति है।

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Maybe, Some Pages Of History Are Supposed To Remain Missing Forever.

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